उपवन की अभिलाषा
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सुंदर फूलों के उपवन की
एक अनोखी अभिलाषा है
हरियाली का आलम हो,
मृदु जलधारा का समागम हो,
बाराहमास सौंदर्य रहे ,
यही उपवन की आशा है,
सुंदर पुष्पों के उपवन की,
एक अनोखी अभिलाषा है।
जेठ माह का भीषण आतप,
झुलस रहा सारा उपवन,
जलबिन तृषित व्याकुल तड़पन,
सिहर उठा धरती का कण कण,
मेघा बरसे उपवन हर्षे,
यह उपवन की आशा है,
सुंदर पुष्पों के उपवन की,
एक अनोखी अभिलाषा है।
पास बहती जलधारा से,
ज्यों माली ने जीवनदान दिया,
उपवन के कण कण में,
नवजीवन का संचार हुआ
उन्मादित हो उपवन बोला
जल ही जीवन की परिभाषा है,
सुंदर पुष्पों के उपवन की,
एक अनोखी अभिलाषा है।
उपवन की चाहत देती ज्ञान,
मानव जीवन है उपवन समान,
जल ही जीवन का आधार,
जल से ही है जीवन विस्तार,
जीवन घट सिंचित रहे जल से,
यह जन जन की अभिलाषा है,
सुंदर पुष्पों के उपवन की,
एक अनोखी अभिलाषा है।
© देव सिंह गढ़वाली